ईथर

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ईथर संज्ञा पुं॰ [अं॰]

१. एक प्रकार का अति सूक्ष्म और लचीला द्रव्य या पदार्थ जो समस्त शून्य स्थल में व्य़ाप्त है । यह अत्यंत घन पदार्थों के परमाणु के बीच में भी व्य़ाप्त रहता है । उष्णता और प्रकाश का संचार इसी के द्वारा होता है ।

२. एक रासायनिक द्रव पदार्थ जो अलकोहल और गंधक के तेजाब से बनता है । विशेष—बोतल में अलकोहल और गंधक का तेजाब बराबर मात्रा में मिलाकर भरते हैं । फिर आंच द्वारा उसे दूसरी बोतल मे ं टपका लेते हैं;जो ईथर कहलाता है । यह बहुत शीघ्र जलनेवाला पदार्थ है । खुला रखा रहने से यह बहुत जल्द उड़ जाता है और बहुत शीत पैदा करता है;इसलिये बरफ जमाने में काम आता है । रासायनिक क्रियाओं में इससे बडे़ बडे़ कार्य होते हैं । सूँघने से यह थोडी बेहोशी पैदा करता है तथा क्लोरोफार्मं की जगह भी काम में लाया जाता है । यह जरमनी में बहुत ज्यादा बनता है ।