उखड़ना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उखड़ना क्रि, अ॰ [सं॰ उत्कुष्ट, पा॰ उक्कक्ख अथवा सं॰ उत्खनन, पा॰ उक्खडन]

१. किसी जमी या गड़ी हुई वस्तु का अपने स्थान से अलग हो जाना । जड़ सहित अलग होना । खुदना । जमना का उलटा । जैसे—आँधी आने से यह पेड़ जड़ से उखड़ गया ।

२. किसी दृढ़ स्थिति से अलग होना । जैसे—अँगूठी से नगीना उखड़ गया ।

३. जोड़ से हट जाना । जैसे—कुश्ती में उसका एक हाथ उखड़ गया ।

४. (घोड़े के संबंध में) चाल में भेद पड़ना । तार या सिलसिले का टूटना । जैसे—यह घोडा थोड़ी ही दूर में उखड़ जाता है ।

५. संगीत में बेताल और बेसुर होना । जैसे—वह अच्छा गवैया नहीं है, गाने में उखड़ जाया करता है ।

६. ग्राहक का भड़क जाना । जैसे— दलालों के लगने से गाहक उखड़ गया ।

७. एकत्र या जमा न रहना । तितर बितर हो जाना । उठ जाना । जैसे—वर्षा के कारण मेला उखड़ गया ।

८. हटना । अलग होना । जैसे— जब वह बहाँ से उखड़े तब तो किसी दूसरे की पहुँच वहाँ हो ।

९. टूट जाना । जैसे—तुक्कल हत्थे पर से उखड़ गई ।

१०. सीवन या टाँके का खुलना । संयो॰ क्रि॰—आना ।—जाना ।—पड़ना ।

११. परस्पर की बातचीत में क्रोध या आवेश में आना (बोल॰) मुहा॰—उखड़ी उखड़ी बातें करना = बेलौस बातें करना । उदासीनता दिखाते हुए बात करना । विरक्तिसूचक बात करना । उखाड़ी पुखड़ी सुनाना = ऊँचा नीचा सुनाना । अंडबंड सुनाना । उखाड़ी उखड़ना = कुछ किया हो सकना । जैसे— वहाँ तुम्हारी कुछ भी उखाड़ी न उखड़ेगी । तबीयत या मन का उखड़ना = किसी की ओर से उदासीनता होना । विरत्ति होना । दम उखड़ना = (१) बँधी हुई साँस टूटना ।(२ गाते गाते या बात करते करते स्वरभंग होना ।(३) दर निकलना । प्राण निकलना । पैर या पाँव उखड़ना = (१ ठहर न सकना । एक साथ पैर जमा न रहना । जैसे—नदी के बहाव से पाँब उखड़े जाते हैं । लड़ने के लिये सामने न खड़ा रहना । भागना । जैसे—बैरियों के धावे से उनके पाँव उखड़ गए ।