उखाड़

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उखाड़ संज्ञा पुं॰ [हिं॰ उखाड़ना]

१. उखाड़ने की क्रीया । उत्पाटन ।

२. कुश्ती के पेंच का तोड़ । वह युक्ती जिससे कोई पेंच रद किया जाता है ।

३. कुशती का एक पेंच । उखेड़਍- । ऊचकाव । विशेष—यह उस समय काम में लाया जाता है जब विपक्षी पट होकर हाथ और पैर जमीन में अड़ा लेता है । इसमें विपक्षी क े दाहिने पैर को अपने दाहिने पैर में फँसाकर कमर तक ऊपर उठाते हैं और अपना दाहिना हाथ विपक्षी की पसलियों से ले जाकर उसकी गर्दन पर चढ़ाते हैं और दबाकर चित करते हैं ।

४. विपक्षी को गिराने के लिये उसकी टाँगों में घुस जाना । मुहा॰—उखाड़ पछाड़ = (१)अदल बदल । इधर का उधर । उलट पलट । उ॰— इसका उखाड़ पछाड़ ठीक नहीं । प्रेमधन॰, भा॰२, पृ॰२११(२)इधर की उधर लगना । अगाई लुतरी चुगलखोरी ।