उखेरना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उखेरना पु क्रि॰ स॰ [हिं॰ उखेड़ना] नोचकर अलग करना । उ॰— (क) इतनी सुनत जसोदानंदन गोबर्धन तन हेरौ । लियौ उठाइ, ,सैल भुज गहि के, महि तैं पकरि उखेरौ सूर॰,१० । ८६८ । (ख, ज्यौं दिवाल गीली पर काँकर डारत ही जु गड़े रे । सूर लटकि लागे अँग छवि, पर निठुर ना जात उखेरे । सूर॰, १० । २२२३ ।)