उघड़ना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उघड़ना क्रि॰ अ॰ [सं॰ उदघाटन, प्रा॰ उग्घाडण]

१. खुलना । आवरण का हटना । (आवरण के संबंध में) ।

२. खुलना । आवरण रहित होना । (आवृत के संबंध में) । उ॰—सुपन में हरि दरस दीनहों, मैं न जाणयो हरि जात । नैन म्हारा उघड़ आया, रही मन पछतात । —संतवाणी॰, पृ॰ ७० ।

३. नंगा होना । मुहा॰— उघड़कर नाचना = खुल्लमखुल्ला लोकलज्जा छोड़कर मनमाना काम करना ।

४. प्रगट होना । प्रकाशित होना ।

५. भंडा फूटना । मुहा॰—उघड़ पड़ना = खुल पड़ना । अपने असल रूप को खोल देना । भेद प्रकट कर देना । दे॰ 'उघटना' ।