उचाढ़ी

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

उचाढ़ी पु वि॰ स्त्री॰ [सं॰ उच्चटित] उचाट । उदासीन । अनमना । विखत । उ॰—सखी संग की निरखति यह छबि भई व्याकुल मन्मथ की डाढ़ी । सूरदास प्रभु के रसबस सब भवन काज तें भई उचाढ़ी । ।—सूर॰, १० । ७३६ ।