उछंग
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उछंग पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ उत्सङ्ग प्रा॰ उच्छंग]
२. गोद । क्रोड़ । कोरा । उ॰—(क) स्तुति करि वे गए स्वर्ग को अभय हाथ करि दीन्हों, बंधन छोरि नंदबालक को लै उछंग करि लीन्हों ।—सूर (शब्द॰) (ख) जननी उमा बोलि तब लीन्ही, लेइ उछंग सुंदर सिख दीन्ही । तुलसी (शब्द॰) ।
२. समीप । अतिनिकट । उ॰— जानि कुअवरु प्रीति दुराई, सखि उछंग बैठी पुनि जाई ।— मानस १ । ६८ ।
३. हृदय । मुहा॰—उछंग लेना = आलिंगन करना । हृदय से लगना । उ॰—मैं हारी त्यों ही तुम हारो चरन चापि स्रम मेटौंगी । सूर स्याम ज्यों उछंग लई मोहि त्यों में हूँ हँसि भेटौंगी ।— सूर॰ १० । ११४७ ।