उठौनी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उठौनी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ उ॰+औनी (प्रत्य॰)]
१. उठाने की क्रिया ।
३. उठाने की मजदूरी या पुरस्कार ।
३. वह रुपया जो किसी फसल की पैदावार या और किसी वस्तु के लिये पेशगी दिया जाय । अगौहा । बेहरी । दादनी ।
४. बनियों या दूकानदारों के साथ उधार का लेन देन ।
५. वह दक्षिण जो पुरोहित या ज्योतिषी को विवाह का मूहूर्त विचारने पर दी जाती है । पुरहत ।
६. वह धन या रुपया आदि जो निम्न जातियों में वर की ओर से कन्या के घर विवाह करने से पहले उसे दृढ़ बनाने के लिये भेजा जाता है । लगनं धरौआ ।
७. वह रुपया पैसा या अन्न जो संकट पड़ने पर किसी देवता की पूजा के उद्देश्य से अलग रखा जाय ।
८. वैश्यों के यहाँ की एक रीति जो किसी के मर जाने पर होती है । इसमें मरने के दूसरे या तीसरे दिन बिरादरी के लोग इकट्ठे होकर मृतक के परिवार के लोगों को कुछ रुपया देते हैं और पुरुषों को पगड़ी बाँधते हैं ।
९. एक रीति जो किसी के मरने के तिसरे दिन होती है । इसमें मृतक की अस्थि संचित करके रख दी जाती है ।
१०. एक लकड़ी जिसमें जुलाहे पाई की लुगदी लपेटते हैं ।
११. धान के खेत की हलके हल की दूर दूर जाताई । यह दो प्रकार की होती है—बिदहनी और धुरहनी । आधिक पानी होने पर जोतने को बिदहनी कहते हैं और सूखे में जोतने को धुरहनी कहते हैं । गाहना ।
१२. प्रसूता की सेवा सुश्रूषा ।