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उत्तू

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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उत्तू ^१ संज्ञा पुं॰ [हिं॰]

१. वह औजार जिसकी गरम करके कपड़े पर बेल बूटों रथा चु्न्नट के निशान ड़ालते हैँ ।

२. बेलबूटे का काम जो इस औजार से बनता है । क्रि॰ प्र॰—करना । का काम बनना । मुहा॰—उत्तू करना=(१) गाली देना ।

२. कपड़े पर बेल बूटे की छाप या चुन्नट ड़ालना । मारकर उत्तू बनाना=किसि को इतना मारना की उसके बदन में दाग पड़ जायँ तो कुछ दिन तक बने रहें ।

उत्तू ^२ वि॰ बदहवाशा । नशे में चूर । क्रि॰ प्र॰— करना ।— होना । जैसे, उसने इतनी भाँग पी ली कि उत्तू हो गया (शब्द॰) ।