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उत्प्रेक्षोपमा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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उत्प्रेक्षोपमा संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] एक अथलिंकार जिसमें किसी एक वस्तु के गुण का बहुतों में होना पाया जाना वर्णन किया जाता है । उ॰—न्यारो ही गुमन मन मिननि के मानियत जानियत सबही सुकैसे न जताइये । गर्ब बाढयो परिमाण पंचबाण बाणनि को आन भाँति बिनु कैसे कै बताइये । केसोदास सविलास गीत रंग रंगनि कुरंगअं गनानि हूँ के आँनसनि गाइये । सीता जी के नयन की निकाई हमही मैं है सु झूठै है कमल खंजरीट हूँ में पाइये ।—केशव (शब्द॰) ।