उदारना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उदारना क्रि॰ स॰ [सं॰ उद्दारण]
१. फाड़ना । विदीर्ण करना । उ॰—भनैं रघुराज तैसे अतिथि से आदर को, आसु ही अनादर उदारयो करि पीर को । ।—रघुराज (शब्द॰) ।
२. गिराना । तोड़ना । ढाना । छिन्न भिन्न करना । उ॰—रावण से गहि कोटिक मारों । कहहु तो जननि जानकी ल्याऊँ कहो तो लंक उदारों । कहों तो अबहीं पैठि सुभट हति अनल सकल पुर जारों ।—सूर (शब्द॰) ।