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उद्घन

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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उद्घन संज्ञा पुं॰ [सं॰] बढ़ई के काम करने की वह लकड़ी जिसपर रखकर वह लकड़ियों को गढ़ता है । ठीहा [को॰] ।