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उद्दोत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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उद्दोत ^१पु वि॰ [सं॰ उद्योत] प्रकाश । उ॰—बन ते घर आवै नहीं घर ते बन नहीं जाइ, सुंदर रवि उद्दोत तै तिमिर कहा ठहराइ ।—सुंदर ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ ८११ ।

उद्दोत ^२ वि॰

१. प्रकाशित । चमकीला ।

२. उदित । उत्पन्न । उ॰— काहू को न भयो कहूँ ऐसो सगुन न होत, पुर पैठत श्रीराम के भयो मित्र उद्दोत ।—केशव (शब्द॰) ।

उद्दोत ^१ वि॰ [सं॰ उद्द्योत] प्रकाशित । ज्योतियुक्त । कांतियुक्य [को॰] ।

उद्दोत ^२ संज्ञा पुं॰

१. प्रकाश । उजाला । उ॰—ज्ञान उद्योत करि हृदय गरु वचन धरि जोग संग्राम के खेत आवै ।—गुलाल॰, बानी पृ॰ १०९ ।

२. चमक । झलक । आभा ।

३. प्रकाशन । व्यक्तीकरण । आविष्करण (को॰) ।

४. ग्रंथ का विभाग । अध्याय या परिच्छेद (को॰) ।

५. महाभाष्य, काव्यप्रदीप और रत्ना- वली की टीका का नाम (को॰) ।