उधरना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उधरना पु ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ उद्वरण]
१. उद्वार पाना । मुक्त होना । छुटकारा पाना । उ॰ —साधु जन संसार में शीतल चंदन वास, दादु केते उधरे जे आए उन पास ।—दादू॰ बानी, पृ॰ २९१ ।
२. दे॰ 'उधड़ना' ।
उधरना ^२ क्रि॰ स॰ उद्धार करना मुक्त करना ।—उ॰ —सोक कनक— लोचन, मति छोनी । हरी विमल गुन गन जग जोनी । भरत बिबेक बराह बिसाला । अनायास उधरी नेहि काला ।— मानस, । २ । २९६ । (ख) छीर समुद्र मध्य ते यों कहि दीरध वचन उचारा हो । उधरों धरनि असुर कुल मारौं धरि नर तनु अवतारा हो ।—सूर—(शब्द॰) ।