उपांग
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उपांग संज्ञा पुं॰ [सं॰ उपाङ्ग॰]
१. अंग का भाग । अवयव ।
२. वह वस्तु जिससे किसी वस्तु के अंगों की पूर्ति हो । जैसे, वेद के उपांग, जो चार है—पुराण, न्याय, मीमांसा ओर धर्मशास्त्र ।
३. तिलक । टीका ।
४. प्राचिन काल का एक बाजा जो चमड़ा मद़कर बनाया जाता था ।