उभड़ना
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उभड़ना क्रि॰ अ॰ [सं॰ उदिभदन, अथवा उदभरण, प्रा॰ उब्भरण]
१. किसी तल वा सतह का आसपास की तरह से कुछ ऊँचा होना । किसी अंश का इस प्रकार ऊपर उठना कि समूचे से उसका लगाव बना रहे । उकसना । फूलना । जैसे—गिलटी उभड़ना । फोड़ा उभड़ना । उ॰—नारंगी के छिलके पर उभड़े हुए दाने होते हैं ।
२. किसी वस्तु का इस प्रकार ऊपर उठना कि वह अपने आधार से लगी रहे । ऊपर निकलना । जैसे—तभी तो खेत में अँखुए उभड़ रहे हैं ।
३. आधार छोड़कर ऊपर उठना । उठना । जैसे—मेरा तो पैर ही नहीं उभड़ता चलूँ कैसे ?
४. प्रकट होना । उत्पन्न होना । पैदा होना । जैसे—दर्द उभड़ना, ज्वर उभड़ना ।
५. खुलना । प्रकाशित होना । जैसे—बात उभड़ना ।
६. बढ़ना । अधिक होना । प्रबल होना । जैसे—आजकल इसकी चर्चा खूब उभड़ी है ।
७. वृद्धि को प्राप्त होना । समृद्ध होना । प्रतापवान् होना । जैसे—मरहठों के पीछे सिख उभड़े ।
८. चल देना । हट जाना । भागना । उ॰—अब यहाँ से उभड़ो ।
९. जवानी पर आना । उठना ।
१०. गाय, भैसं आदि का मस्त होना ।