उलटाना
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उलटाना पु † क्रि॰ स॰ [हिं॰ उलटना]
१. पलटना । लौटाना । पीछे फेरना । उ॰—बिहारीलाल, आवहु, आई छाकि । भई अबार गाइ बहुरावह उलटावहुँ दै हाँक ।—सूर (शब्द॰) । (ख) जो शोक सों भई मातुगन की दिशा सो उलटा इहैं ।—हरिश्चंद्र (शब्द॰) ।
२. और का और करना या कहना । अन्यया करना या कहना । उ॰—हरि से हित ू सों भ्रम भूल हु न कीजे मान हाँतो करि हियहू सों होत हिय हानिए । लोक में अलोक आन नीकहू लगावत हैं सीता जु को दूत गीत कैसे उर आनिए । आँखिन जो देखियत सोई सीँची केशवराइ कानन की सुनी साँची कबहूँ न मानिए । गोकुल की कुलटी ये यों ही उलटावति हैं आज लौं तो वैसी ही है काल्हि कहा जानिए ।—केशव (शब्द॰) ।
३. फेरना । दूसरे पक्ष मे करना । इ॰—(क) अब लखहु करि छल कलह नृप सों भेद बुद्धि उपाइ कै । परबत जनन सों हम बिगारत राक्षसहि उलटाइ कै ।—हरिश्चंद्र (को॰) ।