उलदना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उलदना ^१पु † क्रि॰ स॰ [सं॰ अवद्रवण अथवा हिं॰ उलटना]
१. उड़ेलना । उझिलना । ढालना । गिराना । बरसाना । उ॰— (क) गाज्यो कापि गाज ज्यों विराज्यों ज्वाल जाल जुत, भाजे धीर बीर अकुलाइ उठ्यो रावनो । धावो धावो धरो सुनि धाए जातुधान धारि बारि धार उलदैं जलद ज्यों न सावनों ।—तुलसी (शब्द॰) । (ख) उलदत मद, अनुमद ज्यों जलधि जल, बल हद भीम कद काहू के न आह के ।—भूषण (शब्द॰) । (ग) लै तुंबा सरजू जल आनी । उलदत मुँहरैं सब कोइ जानी । रघुराज (शब्द॰) ।
उलदना ^२पु क्रि॰ स॰ [प्रा॰ उल्लदिय=लादा हुआ या आक्रांत] लादना । ऊपर लादना । उ॰—मन ही में लादै उलदै अनत न जाय । मनहिं की पैदा मनहिं में खाय ।—पलटू॰, भा॰३, पृ॰ ५४ ।