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उल्लाल

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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उल्लाल संज्ञा पुं॰ [सं॰] एक मात्रिक अर्धसम छंद जिसके पहले और चीसरे चरण में १५ मात्राएँ और दुसरे और चौथे चरण में १३ मात्राएँ होती हैं । जैसे—यह कवित कहा बिन रुचिर मति । मति सो कहा विनही बिरति । कह बिरतिउ लाल गोपाल के । चरननि होय जु प्रीति अति (शब्द॰) ।