उसरना
दिखावट
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]उसरना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ उत्+ सरण (जाना), प्रा॰ उस्सर]
१. हटना । टलना । दूर होना । स्थानांतरित होना । उ॰— (क) कर उठाय घूँघु़ट करत उसरत पट गुझगौट । सुख मोटै लूटी ललन लखि ललना की लोट ।— बिहरी (शब्द॰) । (ख) उसरि बैठि कुकि कागरे जो बलबीर मिलाय । तौ कंचन के कागरे पालूँ छीर पिलाय ।— स॰ सप्तक॰, पृ॰ २५४ । (ग) उनका गुण और फल नित्य के कामों में ऐसे अधिक विस्तार से पाया जाता है कि जिसका ध्यान से उतरना असंभव का है ।— गोल विनोद (शब्द॰) ।
२. बीतना । गुजरना । उ॰— सधन कुंज ते उठे भोर ही श्यामा श्याम खरे । जलद नबीन मिली मनो दामिनि बरषि निशा उसरे । —सूर (शब्द॰) ।
उसरना ^२ क्रि॰ स॰ [सं॰ विस्मरण] विस्मृत होना । भूलना । याद न रहना ।