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उसलना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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उसलना पु क्रि॰ अ॰ [सं॰ उत्+सरण, प्रा॰ उस्सर]

१. दे॰ 'उसरना ^१' । उ॰— ऐल फैल मैल खलक में गैल गैल गजन की ठेल पेल सैल उसलत है । तारा सो तरनि धूरि धारा में लगत जिमि थारा पर पारा परावार यों हलत है॰— भूषण ग्रं॰ पृ॰ ८८ ।

२. तरना । उतरना । पानी के भीतर से ऊपर आना । उ॰— टिग बूडा़ उसला नहीं, यही अँदेशा मोहिं । सलिल मोह की धार में, क्या निंद आई तोहि । —कबीर (शब्द॰) ।