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उससना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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उससना पु क्रि॰ स॰ [सं॰ उत्+सरण]

१. खिसकना । टलना । स्थानांतरित होना । उ॰— (क) गोरे गात उससत जो अमित पट और प्रगट पहिचानै । नैन निकट ताटंक की शोभा मंडल कबिन बखानै ।— सूर॰ (शब्द॰) । (ख) वैसिये सु हिलि मिलि, वैसी पिय संग, अंग मिलत न कैहूँ मिस, पीछे उससति जाति ।— रसकुसुमाकर (शब्द॰) ।

२. साँस लेना । दम लेना । उ॰— एक उसास ही के उससे सिगरेई सुगंध बिदा कर दीन्हे । —केशव (शब्द॰) । तैयारी करना । बनाना । उ॰—कूप उसास्यो कुंभ मैं पानी भरयौ अटूट । सुंदर तृषा सबै गई धाए चारयो षूट । — सुंदर॰ ग्रं॰, भा२, पृ॰ ७६० ।