ऊँडा

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऊँडा ^१ †पु संज्ञा पुं॰ [ सं॰ कुंड ]

१. वह बरतन जिसमें धन रखकर भूमि में गाड़ दें ।

२. चहबच्चा । तहखाना । उ॰— (क) है कोई मुसलमान समझावै । ई मन चंचल चार पाहरू छूटा हाथ न आवै । जोरि जोरि धन ऊँडा़ गाडे जहाँ कोई लेन न पावै ।—कबीर (शब्द॰) । ( ख ) ऊँडा चितरू सम दशा साधूगण गंभीर । जो धोखा विरचै नहीं सोही संत सधीर ।— कबीर (शब्द॰) ।

ऊँडा ^२ वि॰ गहरा । गंभीर उ॰— (क) ऊँडा पाणी कोहरइ थल चढि जाइ निट्ठ । मारवणी कइ कारणइ देस अदीठा दिट्ठ ।— ढोला॰, दू॰ ५२३ । ( ख ) कस्तूरी कंडभरी, मेली उडे ठाँय । दरिया छानी क्यों रहै, साख भरै सब गाँय ।—दरिया॰ बानी॰, पृ॰ ३९ ।