ऊखल

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऊखल ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ उलूखल] काठ या पत्यर का बना हुआ एक गहरा बरतन जिसमें रखकर धान और किसी अन्न की भूसी अलग करने के लिये मूसल से कूटते हैं । औखली । काँडी । हावन । उ॰—ऊखल तनिक तिरीछौ करिकै, डारि दिए तरु तिन मधि बरि कै । —नंद ग्रं॰, पृ॰ २५१ । मुहा॰—ऊखल में सिर देना=झंझट में जान बूझकर पड़ना । ऊखल में सिर देकर मूसल से डरना क्या=झंझट में जान- बूझकर पड़ने पर मुसीबतों की क्या चिंता ।

ऊखल ^२ संज्ञा पुं॰ [सं॰ ऊखर्वल] एक प्रकार का तृण या घास ।