ऊप

विक्षनरी से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज


हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऊप संज्ञा पुं॰ [सं॰ वप्] अन्न का एक तरह का ब्याज । विशेष—इसका व्यवहार यों है कि बीज बोने के लिये जो अन्न किसान लेते हैं उसके बदले में फसल के अंत में प्रति मन दो तीन सेर अधिक देते हैं । कहीं कहीं डयोढ़ा सवाई भी चलता है ।

ऊप ^२पु संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰] दे॰ 'ओप' । उ॰—(क) तौ निरमल मुख देखै जोग होइ तेहि ऊप ।—जायसी (शब्द॰) । (ख) अजब अनूप रूप चमक दमक ऊप, सुंदर सोभित अति सुहावनी । —सुंदर ग्रं॰, भा॰ २, पृ॰ १४९ ।