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ऋग

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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ऋग पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ ऋग्] दे॰ 'ऋग्वेद' । उ॰—(क) पढ़िबी परयो न छठी छमत, ऋगु, जजुर, अथर्वन, साम को ।— तुलसी ग्रं॰, पृ॰ ५३७ । (ख) न हो संतोष इसपर भी तो उपमा तीसरी लेलो । युगल पदधारिणी त्रिगुणात्मिका ऋग की ऋचा समझे । —कविता कौ॰, भा॰ २, पृ॰ २३४ ।