ऐंड़ना

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

ऐंड़ना ^१ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ ऐंठना]

१. ऐंठना । बल खाना ।

२. अँगड़ाना । अँगड़ाई लेना ।

३. इतराना । घमंड करना । उ॰— धन जोबन मद ऐंड़ो ऐंड़ो ताकत नारि पराई । लालच लुब्ध श्वान जूठन ज्यों सोऊ हाथ न आइ ।—सूर (शब्द॰) । मुहा॰—ऐंडा ऐंड़ा फिरना या डोलना=इतराया फिरना । घमंड में फूलकर घूमना । उ॰—जिन् पै कृपा करी नँदनंदन सो ऐँड़ी काहै नहिं डोलै ।—सूर (शब्द॰) ।

ऐंड़ना ^२ क्रि॰ स॰

१. ऐंठना । बल देना ।

२. बदन तोड़ना । अँगड़ाना । उ॰—उठे प्रात गाथा मुख भाषत आतुर रैनि बिहानी । ऐँड़न अंग, जम्हात बदन भरि कहत सबै यह बानी ।—सूर॰ १० ।११७० ।