कंगन

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हिन्दी[सम्पादन]

प्रकाशितकोशों से अर्थ[सम्पादन]

शब्दसागर[सम्पादन]

कंगन संज्ञा पुं॰ [सं॰ कङ्कण] कंकण । मुहा॰—कंगन बोहना = (१) दो आदमियों का एक दूसरे के पंजे को गठना । (२) पंजा मिलाना । पंजा फैसाना । हाथ कंगन को आरसी क्या = प्रत्यक्ष बात के लिये किसी दूसरे प्रमाण की क्या आवश्यकता है ।