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कचरकूट

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कचरकूट संज्ञा पुं॰ [हिं॰ कचरना + कूटना]

१. खूब पीटना और लतियानं । मारकूट । क्रि॰ प्र॰— करना ।— मचाना ।

३. खूब पेट भर भोजन । इच्छाभोजन । उ॰— तो कोई गोश्त रोटी और कबाबा की कचरकूट मचा चला । — प्रेमघन॰, भा॰ २, पृ॰ १४२ । क्रि॰ प्र॰— करना ।— होना ।— मचना । — मचाना ।