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कचरना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कचरना पु † क्रि॰ स॰ [सं॰ कच्टचरण = बुरी तरह चलना या अनु॰ कच]

१. पैर से कुचल्ना । रौंदना । दबाना । उ॰—चलो चलु चली चलु बिचलु न बीच ही तें कीच बीच नीच तौ कुटुंब को कचरिहौं । एरे दगाबाज मेरे पातक अपार तोहि गंगा के कछार में पछारि छार करिहौं ।— पद्माकर (शब्द॰)

२. सानना । उ॰— लोग समझते हैं कि साला मूँगफरी के तेल में आटा कचर कर ठगने लगा है ।—वो दुनिया॰, पृ॰ १५५ ।

३. खूब खाना । चबाना । मुहा॰— कचर कचरकर खाना= खूब पेट भर खाना ।