कचरी
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कचरी संज्ञा स्त्री॰ [हिं॰ कच्चा]
१. ककड़ी की जाति की एक बेल जो खेतों में फैलती है । पेंहटा । पेहँटुल । गुरम्हीं । सेंधिया । विशेष— इसमें चार पाँच अंगुल के छोटे छोटे अंड़ाकर फल लगते हैं जो पकने परपील और खटमीठे होता हैं । कच्चे फलों को लोग काटकर सुखाते हैं और भूनकर सोंधाई या तरकारी बनाते हैं । जयपुर की कचरी खट्टी बहुत होती हैं और कड़ुई कम । पच्छिम में सोंठ और पानी में मिलाकर इसकी चटनी बनाते हैं । यह गोश्त गलाने के लिये उसमें ड़ाली जाती हैं ।
२. कचरी या कच्चे पेंहटे के सुखाए हुए टुकड़े ।
३. सूखी कचरी की तरकारी । उ॰— पापरबरी फुलौरी कचौरी । कूरबरी कचरी औ मिथौरी । — सूर॰ (शब्द॰) ।
४. काटकर सुखाए हुए फल मूल आदि जो तरकारी के लिये रखे जाते हैं । उ॰— कुँदरू और ककोड़ा कौर । कचरी चार चचेड़ सौरे । — सूर (शब्द॰) ।
५. छिलकेदार ढ़ाल ।
६. रुई का बिनौला या खूद ।