कचेर

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लखेरा, लखेर, कचेरा, कचेर : लाख का कार्य करना और चूड़ियाँ बेचना[सम्पादन]

right|thumb|300px|लाख की चूड़ियाँ बनाते हुए


लाख (लाह) चूडी तथा अन्य बहुमूल्य धातुओं से चूडी आदि बनाने का कार्य करने वाले और चूडी, के व्यापार करने वाले को कचेर, कचेरा कहते हैं। दूसरे देशों में भी कचेर, कचेरा होते हैं जिन्हें अलग-अलग नामों से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में कचेर को सोलंकी, सिंह, सोनी, वर्मा, तोमर, परिहार, जादौन आदि नामो से जाना जाता है

व्यवसाय[सम्पादन]

ये लाख (लाह) के फैंसी चूडी के निर्माता एवम् विक्रेता होते हैं। आभूषणों का निर्माण और बिक्री करना इनका पारम्परिक कार्य है।

उपस्थिती[सम्पादन]

कचेर, कचेरा जातियाँ मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान , हरियाणा, नई दिल्ली, महाराष्ट्र, झारखण्ड और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों में अधिक पायी जाती है। भारत के अन्य क्षेत्रों में भी कचेर, कचेरा की उपस्थिती देखी जा सकती है। भारत के मध्य भाग मे भी कचेर, कचेरा बहुतायात मे है


प्रमुख व्यक्ति[सम्पादन]

रेफरेन्सेस[सम्पादन]

क्रम संख्या 35 लिखित : http://www.bccomm.mp.gov.in/OBC1/scan0014.pdf

क्रम संख्या 40 लिखित : http://www.bcmbcmw.tn.gov.in/obc/faq/uttarpradesh.pdf

क्रम संख्या 40 लिखित : http://socialjustice.nic.in/writereaddata/UploadFile/bc180810.pdf