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कजाकी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कजाकी संज्ञा स्त्री॰ [तु॰ क़ज्जाक़ + फा॰ ई (प्रत्य॰)]

१. लुटेरापन । लूटमार । उ॰—फिरि फिरि दौरत देखियत निचले नेकु रहैं न । ये कजरारे कौन पै करत कजाकी नैन ।—बिहारी (शब्द॰) ।

२. छल कपट । धोखेबाजी । धूर्तता । उ॰—सहित भला कहि चित अली कजाकी माहिं । कला लला की ना लगी चली चलाकी नाहिं । श्रृं॰—सत॰ (शब्द॰) ।