कठप्रेम
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कठप्रेम संज्ञा पुं॰ [हिं॰ कठ+ सं॰ प्रेंम] वह प्रेम जो प्रिय के उदासीन होने पर भी किया जाय । उ॰—नेह कथैं सठ नीर मथै, हठ कै कठप्रेम को नेम निवाहैं ।—घनानंद, पृ॰ ११८ ।
कठप्रेम संज्ञा पुं॰ [हिं॰ कठ+ सं॰ प्रेंम] वह प्रेम जो प्रिय के उदासीन होने पर भी किया जाय । उ॰—नेह कथैं सठ नीर मथै, हठ कै कठप्रेम को नेम निवाहैं ।—घनानंद, पृ॰ ११८ ।