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कठा

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कठा ^१ पु क्रि॰ वि॰ [सं॰ कथम्] दे॰ 'कहा२' । उ॰—(क) कठा तक जीव हिज जाणँ । रघु॰ रु॰ पृ॰ २४३ ।—(ख) कोटड़ियो बाधौ कठै, आसो डाभी आज ।—बाँकी॰, ग्रं॰, भा॰१, पृ॰ ५८ ।

कठा ^२ पु वि॰ [सं॰ कष्ट+ प्रा॰ कट्ठ, हिं॰ कठ+ आ (प्रत्य॰)] कष्टयुक्त । दुखी । उ॰—अस परजरा विरह कर कठा । मेघ स्याम भै धुआँ जो उठा ।—जायसी ग्रं॰ (गुप्त), ।— पृ॰ ३७० ।