कड़िहार
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कड़िहार ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्णधार]
२. दे॰ 'कर्णधार' ।
२. निकालने— वाला । उद्धारक । उ॰—चत्रभुज बके जी सहते जी और चौके तुम सही चार ही कड़िहार जग में बचन यह निश्चय कही ।— कबीर सा॰, पृ॰ १९६ ।
कड़िहार ^२ पु संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्णधार, प्रा॰ कर्णधार] कर्णधार । केवट । पार लगानेवाला । उ॰—(क) कौन नाम हँसन कहै, कौन देउँ कडिहार । कौन नाम नारिन कहँ, जाते होई उवार ।—कबीर श॰, पृ॰ ४५४ ।