कढ़ना
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क्रिया
[सम्पादित करें]कढ़ना
- उबालना या पकाना, विशेष रूप से किसी चीज़ को तेज़ आँच पर।
- कपड़े या वस्त्र पर सुई-धागे से डिज़ाइन बनाना; कढ़ाई करना।
- किसी भाव, विचार या कला को सुंदर रूप में उभारना (रूपक अर्थ)।
उच्चारण
[सम्पादित करें]उदाहरण वाक्य
[सम्पादित करें]- दूध को अच्छे से कढ़ लो ताकि मलाई आ जाए।
- दादी साड़ी पर फूलों का डिज़ाइन कढ़ रही हैं।
- उसने अपनी कल्पना को सुंदर शब्दों में कढ़ दिया।
प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कढ़ना ^१ क्रि॰ अ॰ [सं॰ कर्षण, प्रा॰ कड्ढन]
१. निकलना । बाहर आना । खिंचना ।
२. उदय होना ।
३. बढ़ जाना । किसी बात में किसी से बढकर प्रमाणित होना ।
४. (प्रतिद्वंद्विता में) निकल जाना (आगे) । बढ़ जाना (आगे) । मुहा॰—कढ़ जाना=किसी के साथ चले जाना । यार के साथ चले जाना । कुटुबं छोड़कर उपपति करना । उ॰—गोकुल के कुल को ताजिकै भजिकै बन बीथिन में बढ़ि जइए । ज्यौ पदमाकर कुंज कछार बिहार पहारन में चढ़ि जइए । हैं नँद- नद गोविंद जहाँ तहाँ नंद में मंदिर में मढ़ि जइए । यौं चित चाहत एरी भटू मनमोहनै लेके कहूँ कढ़ि जइए ।—पद्माकर (शब्द॰) ।
कढ़ना ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ गाढ़ा] दूध का औटाया जाकर गाढ़ा होना ।