कथीर
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कथीर संज्ञा पुं॰ [सं॰ कस्तीर, पा॰ कत्थीर] राँफा । हिरनखुरी राँगा । उ॰—(क) कंचन केवल हरिभजन दजी कथा कथीर ।— कबीर (शब्द॰) । (ख) अब तो मैं ऐसा भया निरमोलिक निज नाम । पहले काच कथीर था फिरता ठामहि ठाम ।—कबीर (शब्द॰) । (ग) जहै वह बीरज परयो सुनीजै । रेम भई तह की सब चीजैं । ता आगे की चीजैं रूपो । होत भई पुनि लोह अनूपो । जहँ वह बीरह कोमल छायो । तहुँ कथीर राँग सोहायो ।—पद्माकर (शब्द॰) ।