कनकनाना
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कनकनाना ^१ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ काँद, पुं॰, हिं॰ कान] [संज्ञा कनक— नाहट]
१. सूरन, अरवी आदि वस्तुओं के स्पर्श से मुँह हाथ आदि अंगों में एक प्रकार की वेदना या चुनचुनाहट प्रतीत होना । चुनचुनाना । जैसे,—सूरन खाने से गला कनकनाता है ।
२. चुनचुनाना या कनकनाहट उत्पन्न करना । गला काटना । जैसे,—वासुकी सूरन बहुत कनकनाता है ।
३. अरुचिकर लगना । नागवार मालूम होना । जैसे,—हमारी बातें तुम्हें बहुत कनकनाती हैं ।
कनकनाना ^२ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ कान> कन] कान खड़ा करना । चौकन्ना होना । जैसे,—पैर की आहट पाते ही हिरन कनक- नाकर खड़ा हुआ ।
कनकनाना ^३ क्रि॰ अ॰ [हिं॰ गनगनाना] गनगनाना । रोमांचित होना ।