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कपटना

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कपटना क्रि॰ स॰ [सं॰ कल्पन, कलुप्त अथवा हिं॰ कपट से नामिक धातु]

१. काटकर अलग करना । काटना । छाँटना । खोटना । उ॰—(क) कपट कपट डारियो निपट कै औरन सों मेटी पहचान मन मौ हूँ पहिचान्यो है । जीत्यो रति रम, मथ्यो मनमथ हूँ को मन केशाराइ कौन हूँ पै रोष उर आन्यो है ।— केशव (शब्द॰) । (ख) पापी मुख पीरो करै, दासन की पीर हरै, दुख हेत कोटि भानु सी दपड है । कपट कपट डार रे मन गँवार झट, देखु नव नट कृष्ण प्यारे को सुपद है ।—गोपाल (शब्द॰) ।

२. काटकर अलग निकालना । धीरे से निकाल लेना । किसी वस्तु काकुछ भाग निकालकर उसे कम करना । जैसे,——जो रुपए मुझे मिले थे, तुमने तो उनमें से ५) कपट लिए ।