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कपालकेतु

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कपालकेतु [सं॰] बृहत्संहिता के अनुसार एक केतु । विशेष—इसके पूँछ धुँएदार प्रकाशरश्मि तुल्य होती है । यह आकाश के पूवर्धि में अमावस्या के दिन उदय होता है । इस तारे के उदय से भारी अनावृष्टि होती है और अकाल पड़ता है ।