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कपोतव्रत

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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कपोतव्रत संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] चुपचाप दूसरे के अत्याचारों को सहना । दूसरे के पहुँचाए हुए अत्याचार या कष्ट पर चूँ न करना । उ॰—है इत लाल कपोतव्रत कठिन प्रीति की चाल । मुख सों आह न भाखिहौं निज सुख हलाल (शब्द॰) । विशेष—कबूतर कष्ट के समय नहीं बोलता, केवल हर्ष के समय गुटर गूँ की तरह का अस्फुट स्वर निकलता है ।