कबरी
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कबरी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] चोटी । जूड़ा । उ॰—हैं बूझ्यों कबरीन सों क्यों कारी दरसाइ । कहीं जु रबि सनमुख रहै, सो कारो ह्वै जाय ।—स॰ सप्तक, पृ॰ २८३ ।
कबरी संज्ञा स्त्री॰ [सं॰] चोटी । जूड़ा । उ॰—हैं बूझ्यों कबरीन सों क्यों कारी दरसाइ । कहीं जु रबि सनमुख रहै, सो कारो ह्वै जाय ।—स॰ सप्तक, पृ॰ २८३ ।