कबिराव
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कबिराव † संज्ञा पुं॰ [सं॰ कवि+ हिं॰ राव] दे॰ 'कविराज' । उ॰— उपजत जाहि बिलोक कै चित्त बीच रस भाव । ताहि बखानत नायका, जे प्रवीन कबिराव ।—मति॰ ग्रं॰, पृ॰ २७३ ।
कबिराव † संज्ञा पुं॰ [सं॰ कवि+ हिं॰ राव] दे॰ 'कविराज' । उ॰— उपजत जाहि बिलोक कै चित्त बीच रस भाव । ताहि बखानत नायका, जे प्रवीन कबिराव ।—मति॰ ग्रं॰, पृ॰ २७३ ।