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करच

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करच पु क्रि॰ वि॰ [फा॰ किर्च] टुकड़े टुकड़े । खंड खंड । उ॰—(क) करच करच टुटि फुटि गयौ ऐसें । हर सर हत्यो त्रिपुर रिपु जैसें ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ २४२ । (ख) करच करच ह्वै गयौ लिलार । मुखतैं चली रुधिर की धार ।—नंद॰ ग्रं॰, पृ॰ २६८ ।