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करपिचकी

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करपिचकी पु संज्ञा स्त्री॰ [सं॰ कर=हाथ + हिं॰ पिचकी (पिचकारी)] दोनो हाथों के योग से बनाई हुई पिचकारी । उ॰— छिड़के नाह नवोढ़ दृग, करपिचकी जल जोर । रोचक रँग ताली भई विय तिय लोचन कोर । बिहारी (शब्द॰) । विशेष— प्रायः लोग दोनों हाथों के बीच में, कई प्रकार से जल भरकर इस प्रकार और ऐसे दबाते हैं कि उसमें से पिचकारी सी छूटती है इसी को करपिचकी कहते हैं ।