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करर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करर संज्ञा पुं॰ [देश॰ ]

१. एक जहरीला कीड़ा जिसके शरीर में बहुत सी गाँठें होती हैं ।

२. रंग के अनुसार धोड़े का एक भेद ।

३. एक प्रकार का जंगली कुसुम वा बरें का पौधा । विशेष— यह उत्तरपश्चिम में पंजाब, पेशावर, आदि सूखे स्थानों में बहुत होता है । जहाँ यह अधिक होता है वहाँ इसके बीज का तेल निकाला जाता है जो पोली का तेल कहलाता है । अफरीदियों का मोमजामा इसी तेल से बनाया जाता है । इसमें फूल बहुत अधिकता से लगते हैं । इसकी लकड़ी बहुत मुलायम होती है । इसकी टहनियाँ और पत्तियाँ चारे के काम में आती हैं ।