कररेचकरत्न
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प्रकाशितकोशों से अर्थ
[सम्पादित करें]शब्दसागर
[सम्पादित करें]कररेचकरत्न संज्ञा पुं॰ [सं॰] नृत्य में ५१ प्रकार के चालको या हाथ घमाने फिराने की मुद्राओं में से एक जो बहुत कठिन समझी जाती है । विशेष— इसमें दोनों हाथों को कमर पर रख स्वस्तिक कर माथे पर ले जाते हैं तथा हाथों को मंडलाकार करते हुए ऊपर लाते हैं । फिर एक हाथ नितंब पर रखकर दूसरे हाथ को पहिए की तरह घुमाते हुए दोनों हाथों को झुलाते हैं और सिर सरल उतारी करके सीधा फैलाते हैं । फिर उद्वेष्ठित, प्रसारित आदि कई प्रकार के कंधों के पास दोनों हाथ घुमाते हैं । इसी प्रकार की और बहुत सी क्रियाएँ करते हैं ।