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करवर

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करवर पु† संज्ञा स्त्री॰ [देश॰] अलप । घात । विपत्ति । औचट । आफत । संकट । आपत्ति । कठिनाई । मुसीबत । जानजोखिम । उ॰— (क) ईश अनेक करवरै टारी । — तुलसी (शब्द॰) । (ख) क्यों मारीच सुबाहु महाबल प्रबल ताड़का मारी । मुनि प्रसाद मेरे राम लखन की विधि बड़ि करवरैं टारी । — तुलसी (शब्द॰) । (ग) कुँवरि सों कहति वृषभानु घरनी ।.......बडी करवर टरी साँप सों ऊबरी, बात के कहत तोहि लगति जरनी ।—सूर (शब्द॰ ) । (घ) बुझहु जाय तात सों बात ।.... जब ते जनम भयो हरि तेरो कितने करवर टरे कन्हाई । सूर स्याम कुल देवनि तोको जहाँ तहाँ करि लिए सहाई ।—सूर (शब्द॰) । क्रि॰ प्र॰—टलना । —पड़ना ।