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करष

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प्रकाशितकोशों से अर्थ

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शब्दसागर

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करष ^१ संज्ञा पुं॰ [सं॰ कर्ष ]

१. खिंचाव । मनमोटाव । अकस । तनाजा । तनाव । द्रोह । उ॰— कंत करष हरि सन परि हरहू । मोर कहा अति हित हिय धरहू ।—तुलसी (शब्द॰) ।

२. क्रोध । असर्ष । ताव । लड़ाई का जोश । उ॰— बातहिं बात करक बढ़ि आई । जुगुज अतुल बल पुनि तरुनाई ।— तुलसी (शब्द॰) ।

करष ^२ पु संज्ञा पुं॰ [अ॰ कलक] दुख । व्यथा । उ॰— सुण वाणी तन करष मिटे सह छक बँदे मन हरष छया । — रघु॰ रु॰, पृ॰ ९८ ।